राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान (IMA) के पास जमीन सौदे पर प्रशासन तैयार कर रहा रिपोर्ट

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान (IMA) के पास जमीन सौदे पर प्रशासन तैयार कर रहा रिपोर्ट

देहरादून, 08 फरवरी । देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के समीप स्थित एक भूमि को वर्ग विशेष को बेचने के प्रकरण को लेकर राज्य में चर्चा तेज हो गई है। प्रकरण में कृषि भूमि के उपयोग और बिक्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यह मामला शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष डॉ. महमूद असद मदनी हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला ग्राम हरियावाला-धौलास पछवादून परगना विकासनगर का है। सूत्रों के अनुसार, नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान उक्त ट्रस्ट को आईएमए के समीप इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोलने के लिए प्रारंभिक अनुमति दी गई थी। इसके लिए देहरादून जिले के हरियावाला क्षेत्र में किसानों से लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी सामने आई थी।

आईएमए जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले जाया गया, जहां से उसे कोई राहत नहीं मिली।

बाद में ट्रस्ट के अध्यक्ष की ओर से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित भूमि का लैंड यूज परिवर्तित नहीं किया जाएगा और वह कृषि भूमि ही बनी रहेगी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि भूमि बेची जाती है तो वह भी कृषि प्रयोजन के लिए ही हो और उससे प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में उपयोग की जाए। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि भूमि की बिक्री की जाती है, तो वह कृषि भूमि के रूप में ही होगी और उससे प्राप्त धनराशि का उपयोग ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में किया जाएगा।

राज्य सरकार के राजस्व विभाग की ओर से वर्ष 2016 में देहरादून जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में भी उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की बात कही गई थी।

इस बीच, यह जानकारी सामने आई कि ट्रस्ट की ओर से एक स्थानीय व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई थी। इसके बाद भूमि के कुछ हिस्सों की बिक्री की गई। स्थानीय स्तर पर एक वर्ग विशेष के लोगों को भूमि पर प्लॉटिंग किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पूर्व में ग्राम प्रधान की ओर से जिला प्रशासन को शिकायतें दी गई थीं।

भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पर देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए थे। यह विषय चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बना और जनमानस में भी इस पर व्यापक चर्चा हुई। उस समय कांग्रेस नेता अकील अहमद के मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसे लेकर कांग्रेस को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

इसी क्रम में शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान के उद्देश्य से खरीदी गई भूमि को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि यह भूमि किसानों से खरीदी गई थी।

विकासनगर के एसडीएम विनोद कुमार ने रविवार को बातचीत में बताया कि शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की जमीन बिक्री से जुड़े सभी दस्तावेज जुटाने के लिए एक टीम को मौके पर भेजा गया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि जमीन की बिक्री प्रक्रिया में नियमों का पूर्ण रूप से पालन किया गया है या नहीं। आज शाम और कल (सोमवार) विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि संबंधित क्षेत्र एमडीडीए के अंतर्गत आता है। पूर्व में प्राधिकरण की ओर से यहां बसाई जा रही अवैध कॉलोनी को अभियान चलाकर ध्वस्त किया जा चुका है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की प्लाटिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। एमडीडीए लगातार अवैध अतिक्रमण पर अभियान चला रहा है।